पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी सेना की ईरान के केशम द्वीप पर कार्रवाई से क्षेत्रीय संघर्ष के और गहराने तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। इसके चलते निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए कारोबार किया।
ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.23 प्रतिशत बढ़कर 107.21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी तेजी देखने को मिली। डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.62 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।
हालांकि, इससे पहले सोमवार को कच्चे तेल के बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। ब्रेंट क्रूड की कीमत 8.66 डॉलर यानी 7.6 प्रतिशत गिरकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई थी। मंगलवार की तेजी ने बाजार में जारी अनिश्चितता को फिर उजागर कर दिया है।
केशम द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई से बढ़ा तनाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस अभियान को रक्षात्मक कदम बताया है। इसका उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को सीमित करना बताया गया है, जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि संघर्ष का विस्तार होता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी
सैन्य तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से वॉशिंगटन के साथ बातचीत चल रही है।
हालांकि, कतर की मध्यस्थता में हाल ही में हुई वार्ताओं से कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। ईरान की ओर से संशोधित प्रस्ताव पेश किए जाने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं अभी समाप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता जताते हुए कहा कि बातचीत का रास्ता अब भी खुला है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है।
इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। तेल आपूर्ति में कमी की आशंका से कीमतों में तेजी आने के साथ ही परिवहन लागत और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल, पेट्रोलियम उत्पादों की लागत और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद बढ़ सकती है अस्थिरता
अक्टूबर में ब्रेंट क्रूड छह महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ था। अब बाजार में यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान वार्ता, सैन्य गतिविधियों और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी।
यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इसके विपरीत, संघर्ष बढ़ने और आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
